किन किन देशों में भारतीय करंसी मान्य है और क्यू?🧐
क्या आप जानते हैं कि दुनिया का 85% व्यापार अमेरिकी
डॉलर की मदद से होता है? दुनिया भर के 39% क़र्ज
अमेरिकी डॉलर में दिए जाते हैं और कुल डॉलर की
संख्या के 659 का इस्तेमाल अमेरिकी के बाहर होता है.
इसलिए विदेशी बैंकों और देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार
में डॉलर की ज़रूरत होती है. यही कारण है कि डॉलर को
'अंतरराष्ट्रीय व्यापार करेंसी' कहा जाता है.
डॉलर को पूरी दुनिया में इंटरनेशनल करेंसी का तमग
हासिल है. कोई भी देश डॉलर में भुगतान लेने को तैयार
हो जाता है. लेकिन क्या इस तरह का सम्मान भारत की
मुद्रा रुपया को मिलता है. जी हाँ, भले ही रुपये को डॉलर
जितनी आसानी से इंटरनेशनल ट्रेड में स्वीकार ना किया
जाता हो लेकिन फिर भी कुछ ऐसे देश हैं जो कि भारत की
करेंसी में आसानी से पेमेंट स्वीकार करते हैं. आइये इस
लेख में इन सभी देशों के नाम जानते हैं.
डॉलर को पूरी दुनिया में इंटरनेशनल करेंसी का तमगा
हासिल है. कोई भी देश डॉलर में भुगतान लेने को तैयार
हो जाता है. लेकिन क्या इस तरह का सम्मान भारत की
मुद्रा रुपया को मिलता है. जी हाँ, भले ही 'रुपये को डॉलर
जितनी आसानी से इंट्रनेशनल ट्रेड में स्वीकार ना किया
जाता हो लेकिन फिर भी कुछ ऐसे देश हैं जो कि भारत की
करेंसी में आसानी से पेमेंट स्वीकार करते हैं. आइये इस
लेख में इन सभी देशों के नाम जानते हैं.
लेकिन ऐसा नहीं है कि इस तरह का सम्मान भारतीय
मुद्रा "रुपये को नहीं मिलता है. दरअसल भारतीय रुपया
नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और मालदीव के कुछ हिस्सों
में अनौपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है. हालॉकि
भारतीय रुपये को लीगल करेंसी के रूप में जिम्बाब्बे में
स्वीकार किया जाता है.
भारत की करेंसी को इन देशों में करेंसी के रूप में इसलिए
स्वीकार किया जाता है क्योंकि भारत इन देशों को बड़ी
मात्रा में वस्तुएं निर्यांत करता है. यहाँ पर यह बताना
जरूरी है कि जब कोई करेंसी अंतरराष्ट्रीय व्यापार करेंसी
बनती है तो उसके पीछे सबसे बड़ा मूल कारण उस देश
का निर्यात' होता है 'आयात नहीं.
इस लेख में यह बताना जरूरी है कि नीचे दिए गए देशों
में जिम्बाब्बे को छोड़कर किसी अन्य देश ने भारत की
मुद्रा को 'लीगल टेंडर अर्थात वैधानिक मुद्र का दर्जा नहीं
दिया है लेकिन भारत के पडोसी देश केवल आपसी समझ
(mutual understanding) के कारण एक दूसरे की
मुद्रा को स्वीकार करते हैं. इन देशों में मुद्रा का लेन देन
मुख्यतः इन देशों की सीमाओऔं से लगने वाले प्रदेशों और
उनके जिलों में ही होता है.
आइये अब विस्तार से जानते हैं कि किन-किन देशों
भारतीय रुपया मान्य/स्वीकार किया जाता है और
1. जिम्बाब्वेः वर्तमान में जिम्बाब्वे की अब अपनी मुद्रा
नहीं है. वर्ष 2009 में दक्षिणी अफ्रीकी देश ने अपनी
स्थानीय मुद्रा, जिम्बाब्वे डॉलर को त्याग दिया था क्योंकि
इस देश में हाइपर-इन्फ्लेशन के कारण देश की मुद्रा
के मूल्य में बहुत कमी आ गयी थी. इसके बाद इसने
अन्य देशों की मुद्राओं को अपने देश की करेंसी के रूप
स्वीकार किया है. वर्तमान में इस देश में अमेरिकी डॉलर,
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, चीनी युआन, भारतीय रुपया,
जापानी येन, दक्षिण अफ्रीकी रैंड और ब्रिटिश पाउंड का
इस्तेमाल किया जाता है. इस देश में भारत की मुद्रा रुपया
को लीगल केंसी के रूप में वर्ष 2014 से इस्तेमाल किया
जा रहा है.
2. नेपाल: भारत के एक रुपये की मदद से नेपाल के 1.60
रुपये खरीदे जा सकते है. भारत के नोट नेपाल में कितनी
बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किये जाते हैं इसका अंदाजा सिर्फ
इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि जब 2016 में भारत
नेनोट्बंदी की थी तब वहां पर लगभग9.48 अरब रुपये
मूल्य के भारतीय नोट चलन में थे. भारत के व्यापारी को
एक भारतीय रुपये के बदले ज्यादा नेपाली मुद्रा मिलती
है इसलिए भारत के व्यापारी नेपाल से व्यापार करने को
यदि दोनों देशों के बीच व्यापार की बात करें तो वित्त वर्ष
2017-18 के पहले ॥ महीनों के दौरान नेपाल से भा
भारतीय नोटों को बंद कर दिया है लेकिन 200 रुपये से
कम के नोट बेधड़क स्वीकार किये जा रहेहैं.
3. भूटान: इस देश की मुद्रा का नाम नोग्तरम है. यहाँ पर
भारत की मुद्रा को भी लेन-देन के लिए स्वीकार किया
जाता है. भूटान के कुल निर्यात का 78% भारत को निर्यांत
केया जाता है. सितम्बर 2018 तक भूटान की ओर से
भारत को 14,917 मिलियन नोंग्त्रुम का आयात भेजा
गया था जबकि इस देश द्वारा भारत से लिया गया निर्यात
12.489 मिलियन नोंग्र्रम था. भारत का पडोसी देश होने
के कारण इस देश के निवासी भारत की मुद्रा में जमकर
खरीदारी करते हैं क्योंकि इन दोनों देशों की मुद्राओं की
वैल्यू लगभग बराबर है और इसी कारण दोनों मुद्राओं के
बीच विनिमय दर में उतार चढ़ाव से होने वाली हानि का
कोई डर नहीं होता है.
4. बांग्लादेश: इस देश की मुद्रा का नाम टका है. वर्तमान
में भारत के एक रुपये के बदले बांग्लादेश के1.7 टका
खरीदे जा सकते हैं. वित्तीय वर्ष 2017-18 (जुलाई-जून) में
भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय व्यापार 9 अरब
डॉलर के पार चला गया है. बांग्लादेश के द्वारा भारत को
किया जाने वाला व्यापार भी 90o मिलियन डॉलर के
करीब पहुँच गया है. इस प्रकार स्पष्ट है कि बांग्लादेश में
भारत का रुपया बहुत बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता हैं.
सिद्धार्थ सिंह
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