Amarnath gufa (The cave Mustery)

0



अमरनाथ  गुफा 



नमस्कार मित्रों स्वागत है। आप सभी का हमारे चैनल पर ।

 

अमरनाथ गुफा सभी प्रमुख दलों में से प्रमुख है। अमरनाथ गुफा हिंदुस्तान के जम्मू कश्मीर में स्थित है। दुनिया के कोने-कोने से बहुत सारे श्रद्धालु हर साल अमरनाथ गुफा का दर्शन करने आते हैं।  जम्मू कश्मीर में स्थित ये अमरनाथ गुफा बेहद प्राचीन है और रहयासो से भरा पड़ा है तो चलिए आज आप सभी को हम बताते हैं। कुछ ऐसे वाक्यों के बारे में जिन्हें सुनकर अचंभित हो जाएंगे। आश्रय चकित हो जाएंगे अमरनाथ का यह पवित्र स्थान। श्री  नगर शहर से 135 किलोमीटर की दूरी पर तथा समुद्र तल से 14000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पवित्र गुफा की गहराई 19 मीटर ,चौड़ाई 16 मीटर तथा ऊंचाई 13 मीटर है। श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है। अगर एक बार इस पवित्र गुफा के दर्शन कर लेता है तो उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है। अमरनाथ गुफा में एक  शिवलिंग अपने आप बनता है।  जी हा बिल्कुल सही सुना।  बर्फ की बारिश के बाद यह शिवलिंग अपने आप तैयार हो जाता है जिसे देखने के लिए हिंदुस्तान के साथ-साथ बहुत सारे शहरों के लोग आते हैं। भक्तों का ऐसा मानना है कि एक बार  जो इस गुफा के दर्शन कर लेता है उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। शिव भक्तों का ऐसा मानना है कि यहां पर माता सती का कंठ गिरा था। हिंदुस्तान की सभी तीर्थ स्थलों में अपना अलग ही महत्व है तथा किसी अन्य तीर्थ स्थल पर जाने के मुकाबले अगर आप  अमरनाथ आते हैं तो आपको हजार गुना ज्यादा फल प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि हजार वर्षों के तपस्या  के बाद जो भी मिलता है।  वो सिर्फ अमरनाथ गुफा के दर्शन मात्र से मिल जाता है। चलिए हम आपको बताते हैं। अमरनाथ गुफा की खोज किसने किया था कि हम सभी के मन में जिज्ञासा जरूर आती होगी।  सबसे पहले किसने जाना है? किसने देखा अमरनाथ गुफा को? 

आज हम अमरनाथ गुफा के बारे में बताएंगे सबसे पहले आइए जानते हैं। दोस्तों बूटा  मलिक नाम के मुसलमान गर्यारिए ने अमरनाथ गुफा की खोज के थी  ऐसी मान्यता है कि बकरी चराते वक्त वो काफी दूर  निकल गया। इस कारण वह जंगल में पहुंच गया। रास्ता भटक जाने के कारण जंगल में फस गया था। सुनसान और वीराना स्थान पर बैठा हुआ था। तभी साधु के भेष में  एक इंसान वहां पर आया। उसने उस गरारिए को एक लकड़ी दिया तथा सही मार्ग बता करके उसे घर की तरफ भेज दिया। जब घर पहुंचा तो वो लकड़ी हीरे के रूप में परिवर्तित हो चुकी थी। तब्दील हो चुकी थी। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा है जैसा कि हम सभी इंसानों के साथ होता है। 
जब भी हमे खुशी मिलती  हैं खुशी के मारे नाचने लगा ।मगर वो वापस लौट कर के उसी स्थान पर गया तो उसे  वहा कोई नही मिला ।वहां पर कोई भी नहीं था। जब वहां पर वापस आया तो एक शिवलिंग  बना हुआ था। इसलिए मान्यता है।  इस स्थान पर आने वालों को भगवान भोलेनाथ दर्शन देते हैं। अमरनाथ गुफा के पास  सिर्फ एक गुफा नहीं है। अमरावती नदी के पास से जब हम गुजरते हैं, छोटी-छोटी गुफाएं आपको देखने को मिल जाएंगे। ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ माता पार्वती को अमर कहानी  उसी स्थान पर सुनाया था। यहां पर जो भी श्रद्धालु पूजा करने जाते हैं। उन्हें 
एक कबूतर का जोड़ा दिखाई पड़ता है। ऐसी मान्यता है, ऐसा माना जाता है। यह जुड़ा कोई और नहीं है बल्कि भगवान शंकर और माता पार्वती जी और जिस किसी को भी यह जोड़ा दिख जाता है, वह धन्य हो जाता है। उसे मोक्ष मिल जाता है। चलिए अब आपको अमरनाथ गुफा का रहस्य बताते हैं। एक बार देवर्षि नारद भगवान भोलेनाथ से मिलने कैलाश पर्वत पर गए हैं, परंतु भोले नाथ वहा पर नहीं थे। वहां पर सिर्फ माता पार्वती बैठी हुई थी। भगवान भोलेनाथ किसी और स्थान पर गए हुए थे। दरअसल  नारद जी  एक खास जिज्ञासा  को लेकर कैलाश पर्वत पर गए हुए थे। उनको भगवान भोलेनाथ से यह पूछना था कि वह अपने गले में मुंडमाला क्यों पहनते है जब यह सवाल उन्होंने माता पार्वती से पूछा  तो माता पार्वती ने  उत्तर देने से इंकार कर दिया। पता नहीं है कि भोलेनाथ गले में मुंडमाला क्यों पहनते हैं जब भगवान भोलेनाथ वापस आए। तो माता पार्वती ने पूछा कि भोलेनाथ आप अपने गले में मुंडमाला क्यों पहनते हैं।तब  भोलेनाथ ने उत्तर दिया है। देवी पार्वती तुमने जितनी बार मनुष्य का जन्म लिया है। मैं  उतनी संख्या का मूंदमाला धारण करता हूं। फिर पार्वती जी ने पूछा कि स्वामी मेरा शरीर नशर्वे  है। बार-बार मृत्यु को प्राप्त होता है। परंतु आप तो अमर हैं। इसका कारण बताइए। भगवान भोलेनाथ ने कहा। हे देवी पार्वती
ये सब अमर कथा के कारण है इस  पर पार्वती जी ने  जिद कि स्वामी आप मुझे भी अमर कथा सुनाए। भोलेनाथ ने वर्षों तक टाल मटोल किया है। मगर अंत में विवश होकर कथा सुनाने के लिए हाही भरी जैसा कि आप सभी जानते हैं। अपने जीवन में पत्नी  जब जिद पर आती है तो पति को मानना ही पड़ता है। परंतु समस्या ये थी  की अमर कथा  आखिर सुनाई  कहा जाए क्योंकि गलती से किसे के जीव के कान  में या किसी भी शैतान के कान में या किसी राक्षस के कान में अगर वह कथा पड़ जाती है। वह भी अमर हो जाता । इसके बाद भोलेनाथ सोच में पड़ गए भोलेनाथ माता पार्वती को साथ लेकर के  अमरनाथ गुफा में पधारा जी हां वो आए और उनको  अमर कथा सुनाया ऐसी मान्यता है कि रक्षाबंधन वाले पूर्णमासी के दिन भगवान भोलेनाथ स्वयं इस गुफा में पधारे थे । अमरनाथ गुफा में बर्फ से बने शिवलिंग की पूजा की जाती है। अमरनाथ गुफा से संबंधित  अमरेश्वर महादेव की कथा भी प्रचलित है। इसके अनुसार आदिकाल में जब संसार की उत्पत्ति हुई है। तब देवता, शार्प  , गंधर्व और राक्षसों की उत्पत्ति हुई।  तब दवेता गर मृत्यु के वश में पड़े हुए थे। तब  सभी देवता घबराकर भगवान भोलेनाथ के दरबार में पहुंचे। सभी को मृत्यु का डर सता रहा था। वह लोग डर के मारे भगवान भोलेनाथ की स्तुति करने लगे तथा अपनी समस्याओं का निदान पूछने लगे
 इस पर कृपालु भोलेनाथ ने उत्तर दिया कि मैं आप सभी की समस्याओं का निदान जरूर करूंगा। ये कहते हुए भगवान भोलेनाथ ने अपने सर से चंद्रमा की कला को उतारा तथा  नीछोड़ दिया। उसके बाद उन्होंने देवताओं से कहा, आप सबों के मृत्यु के ओषधि  है। उस चंद्रकला को छोड़ने के बाद उस चंद्रकला से पवित्र अमृत की धारा बहने लगी तथा अमृत की बूंदें पृथ्वी पर  गिर कर सुख गई इस  पावन गुफा में जो भस्म है वो अमृत बिंदु के कड़ ही थे ।भगवान भोलेनाथ  द्रवभूत हो गए तथा देवताओं से कहा है  देवगर इस गुफा में मेरा शिवस्वरूप यानी की  लिंगस्वरूप दर्शन किया है। इस वजह से आप सबको मृत्यु का भय अब कभी भी नहीं सताएगा। आप सब शिवस्वरूप को प्राप्त होंगे तथा अमर हो जाएंगे। भगवान भोलेनाथ ने कहा कि मेरा यह लिंग स्वरूप  तीनों लोकों में अमरेश  महादेव के नाम प्रसिद्ध होगा। भगवान भोलेनाथ ने देवताओं के भए का नाश किया।  तब से  उनका नाम अमरेश महादेव हुआ।
 दोस्तों, अमरनाथ गुफा का दर्शन करना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। यह जाने के बाद इंसान के सारे पाप  नस्त हो जाते है । और मृत्यु के पश्चात उस इंसान को स्वर्ग में स्थान मिलता है।
 दोस्तों आप भी अगर अमरनाथ की यात्रा की है। 
हमारे साथ कमेंट के माध्यम से अवश्य शेयर करें ताकि लोगों को और ज्यादा पता चले या फिर आपके पास कोई बात हुई।  और अपने कुछ भी देखा हो। वह कमेंट के माध्यम से जरूर शेयर करें। अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें। इसके साथ-साथ ही चैनल को लाइक करें कि आप सभी के लिए जब हम नई जानकारी ले कर के  आएं। आप सभी को सबसे पहले मिले और आप सभी हम सभी को भी हमसे जुड़े हुए हैं। इसके लिए आप सभी का  धन्यवाद, आप सभी से जोड़ते हैं। एक अन्य रिपोर्ट में नया फोन लेकर की जानकारी धन्यवाद। नमस्कार मित्र!



सिद्धार्थ सिंह 





Tags

Post a Comment

0Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*